जयपुर में 'ग्लोबल होली': खासा कोठी में उतरा दुनिया का रंग, 24 देशों के मेहमान बनेंगे साक्षी
Khasa Kothi to witness global celebrations, with guests from 24 countries
'Global Holi' in Jaipur: राजस्थान की राजधानी जयपुर में आज धुलंडी का पर्व वैश्विक रंग में रंगा नजर आएगा। ऐतिहासिक खासा कोठी होटल परिसर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक मिलन का केंद्र बनने जा रहा है। पर्यटन विभाग की ओर से आयोजित इस भव्य 'होली उत्सव' में दुनिया के 24 देशों के विदेशी पर्यटक भारतीय संस्कृति और रंगों के अनूठे मेल के साक्षी बनेंगे।
300 किलो गुलाल और देशी-विदेशी पर्यटकों का संगम
इस वर्ष का आयोजन अपनी भव्यता के कारण बेहद खास है। उत्सव में 3000 से अधिक देशी और विदेशी पर्यटकों के शामिल होने की उम्मीद है। होली खेलने के लिए विशेष रूप से 300 किलो से अधिक प्राकृतिक (हर्बल) गुलाल की व्यवस्था की गई है, ताकि विदेशी मेहमानों की त्वचा को कोई नुकसान न पहुंचे और वे निडर होकर होली का आनंद ले सकें।
तिलक, आरती और लोक नृत्यों से सजेगी संस्कृति
खासा कोठी में जैसे ही विदेशी मेहमान प्रवेश करेंगे, पर्यटन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी राजस्थानी परंपरा के अनुसार तिलक, गुलाल और आरती के साथ उनका गर्मजोशी से स्वागत करेंगे। इसके बाद शुरू होगा राजस्थानी लोक कला का जादू-
- कालबेलिया नृत्य: नागिन की तरह लहराती नृत्यांगनाओं की चपलता मेहमानों को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर देगी।
- घूमर और चक्री: राजस्थानी लोक गीतों की मधुर धुनों पर होने वाले पारंपरिक नृत्य विदेशी सैलानियों को भी थिरकने पर मजबूर कर देंगे।
स्वाद में घुलेगी राजस्थान की मिठास
होली का आनंद तब तक अधूरा है जब तक किपारंपरिक व्यंजनों का स्वाद न चखा जाए। खासा कोठी में विदेशी मेहमानों के लिए विशेष राजस्थानी व्यंजनों की थाली परोसी जाएगी। पर्यटक केसरिया दूध, गुजिया और स्थानीय पकवानों का स्वाद लेते हुए भारतीय संस्कृति की गहराई को महसूस करेंगे।
पर्यटन विभाग की पहल
इस उत्सव को सफल बनाने के लिए पर्यटन विभाग ने शहर के विभिन्न होटलों में ठहरे पर्यटकों को विशेष निमंत्रण पत्र भेजे हैं। होटल फेडरेशन ऑफ राजस्थान और पर्यटन व्यवसाय से जुड़े उद्यमियों के सहयोग से विदेशी मेहमानों को खासा कोठी तक लाने और उन्हें इस उत्सव की जानकारी देने की पूरी रणनीति तैयार की गई है। पर्यटन विभाग की यह अनूठी पहल न केवल राजस्थान के पर्यटन को नई ऊंचाइयों पर ले जाती है, बल्कि 'अतिथि देवो भव:' की भावना को पूरी दुनिया के सामने जीवंत कर देती है।